नई दिल्ली। देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास मौजूद रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) बेहद सीमित है और यह आपात स्थिति में कुछ ही दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, एक आरटीआई जवाब में सरकार ने माना है कि भारत का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार केवल लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है।
हालांकि कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि वास्तविक उपलब्धता इससे भी कम होकर करीब 5 दिनों तक सिमट सकती है, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
⚠️ पहले ही मिल चुकी थी चेतावनी
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने पहले ही देश के सीमित रणनीतिक तेल भंडार को लेकर सरकार को आगाह किया था।
CAG ने कहा था कि भारत की भंडारण क्षमता अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुकाबले काफी कम है और आपातकालीन हालात में यह बड़ा जोखिम बन सकता है।
🌍 क्यों खतरनाक है यह स्थिति?
- भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है
- पश्चिम एशिया में तनाव (जैसे ईरान-अमेरिका संकट) सप्लाई को प्रभावित कर सकता है
- होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रूट बंद होने पर संकट और गहरा सकता है
🛢️ सरकार का क्या कहना है?
सरकार ने इन चिंताओं को कम करते हुए कहा है कि:
- देश के पास कुल मिलाकर 60–74 दिनों का तेल भंडार (रणनीतिक + व्यावसायिक) मौजूद है
- आने वाले हफ्तों के लिए सप्लाई पहले से सुनिश्चित की जा चुकी है
📊 क्या है असली तस्वीर?
- रणनीतिक भंडार: ~9.5 दिन
- कुल (कमर्शियल + रिफाइनरी + रणनीतिक): ~60–74 दिन
➡️ यानी आपातकाल में काम आने वाला रिजर्व काफी सीमित है
🧭 आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को:
- रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर देने
- और आयात स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है
👉 निष्कर्ष:
भले ही कुल तेल भंडार पर्याप्त बताया जा रहा हो, लेकिन असली चिंता रणनीतिक भंडार की कम क्षमता को लेकर है, जो किसी बड़े वैश्विक संकट में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।









