एक अमेरिकी अदालत ने आज Meta Platforms (जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और WhatsApp जैसी सोशल मीडिया सेवाएँ चलाती है) को बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही और उपयोगकर्ताओं को मिथ्या जानकारी देने का दोषी पाया है।
🔹 अदालत के मुताबिक Meta ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को जोखिम में डाला और इसे रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए।
🔹 जूरी ने पाया कि कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को नुकसान पहुँचाया और ऐसे खतरों को छिपाने की कोशिश की।
🔹 मामले में Meta पर कुल ₹3,100 करोड़ (लगभग $375 मिलियन) का जुर्माना लगाया गया है।
⚖️ क्या था मामला?
🟠 न्यू मैक्सिको राज्य के वकील जनरल ने मुकदमा दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि Meta ने:
• बच्चों के खिलाफ यौन शोषण और खतरनाक संपर्क की रोकथाम में विफलता दिखाई
• प्लेटफॉर्म को “सेफ़” दिखाने के लिए उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया
• अपने एल्गोरिद्म और डिज़ाइन में कमजोरियों को नजरअंदाज़ किया
— अदालत ने यह माना कि इन कारणों से बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स असुरक्षित हो गए।
💬 Meta ने क्या कहा?
कंपनी ने फ़ैसले से असहमति जताई है और कहा है कि वे इस निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे। Meta का दावा है कि वे उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए बहुत निवेश करती हैं और लगातार सुधार कर रही है।
🧠 एक बड़ा नज़रिया
यह फ़ैसला टेक कंपनियों की जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है कि वे केवल बढ़ती संख्या में उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने के बजाय सुरक्षा और जवाबदेही को प्राथमिकता दें।

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