नई दिल्ली — भारत में बढ़ते पश्चिम एशिया संकट और इज़रायल‑ईरान युद्ध के आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों को लेकर आज लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता पर पड़ेगा, लेकिन किसानों पर इसका बोझ नहीं होने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी के दौरान जैसे सरकार ने चुनौतियों का सामना किया था, उसी तरह वर्तमान संकट में भी तैयार रहना आवश्यक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कृषि क्षेत्र को स्थिर रखने और किसानों की आय को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र हर संभव कदम उठाएगा।
मोदी ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त उर्वरक और उत्पादन इन्वेंट्री है, और फिलहाल किसानों को किसी कीमत‑भंडार या इनपुट संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा कृषि व सिचाई योजनाओं के तहत बीमा और सब्सिडी जैसी मदद समय पर उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसानों की उपज और आय पर कोई विपरीत असर न पड़े।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इंधन, खाद, पेट्रोलियम और ऊर्जा स्त्रोतों के आपूर्ति चैनलों पर नजर रखे हुए है, तथा जरूरत पड़ने पर थोक स्तर पर हस्तक्षेप कर सकती है ताकि घरेलू बाजार स्थिर रहे।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिदृश्य पर चिंता जताते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता बढ़ने से ऊर्जा कीमतों और लॉजिस्टिक्स पर दबाव दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति एवं रणनीतिक उपायों के कारण इसका प्रतिकूल प्रभाव सीमित करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
केंद्र सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि वह संकट के बीच खाद्य सुरक्षा बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता देने पर लगातार काम कर रही है।

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